भारत की पौराणिक नगरी काशी सबसे प्राचीन नगरी है. इसे वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है. काशी भगवान शिव की नगरी मानी जाती है. मान्यता है कि काशी नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है और प्रलय से समय भी डूबेगी नहीं. यहां भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं. यहां रोजाना भक्त बड़ी संख्या में भगवान भोलेनाथ का दर्शन और पूजन करते हैं. मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां मृत्यु को प्राप्त करने वालों को स्वयं भगवान शिव मोक्ष प्रदान करते हैं. भगवान शिव यहां भले ही विराजमान हों, लेकिन आप जानकर हैरान होंगे कि भगवान यहां एक पल भी विश्राम नहीं करते. वो हमेशा जागते रहते हैं. पुराणों के अनुसार, काशी वो स्थान माना जाता है, जहां समय भी प्रवेश करने से पहले रुकता है.

गरुड़ और स्कंद पुराण के अनुसार…काशी में भगवान शिव के विश्राम न करने का कारण है मृत्यु. गरुड़ और स्कंद पुराण में लिखा है कि काशी में मृत्यु को प्राप्त करने वाला व्यक्ति मृत्यु के देवता यमराज के अधिकार से मुक्त हो जाता है. मान्यता है कि शिव जी यहां स्वयं मृतक के कान में तारक मंत्र फूंकते हैं और जब स्वयं शिव जी मुक्ति दें तो यमराज क्या कर सकते हैं. इसलिए कहा जाता है कि यमराज काशी में प्रवेश नहीं करते.

मान्यताओं के अनुसार, शिव जी अपनी इस नगरी में कभी भी आसन पर नहीं बैठते हैं, क्योंकि यहां हर समय कोई न कोई प्राणी अंतिम सांस ले रहा होता है. इसलिए यहां शिव जी का काम राजा की तरह बैठने का नहीं, बल्कि मार्गदर्शक बनने का है. काशी में शिव जी हमेशा जागते रहते हैं, ताकि किसी भी आत्मा को उनकी प्रतिक्षा न करनी पड़े. यही कारण है कि काशी में कभी शिवलिंग को पूर्ण विश्राम की मुद्रा में नहीं दर्शाया गया.
यहां स्थान मुक्ति का द्वार माना जाता है. कहते हैं कि अगर शिव जी यहां विश्राम करने लगें तो मोक्ष का प्रवाह रुक जाएगा. इसलिए शिव जी काशी में वास करते हैं, लेकिन विश्राम नहीं करते. काशी वो स्थान है, जिसे भगवान शिव कभी छोड़कर नहीं जाते. यही कारण है कि काशी को धरती का सबसे डरावना और पवित्र स्थान एक साथ कहा जाता है.
