Dhurandhar 2 का खुमार दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है. इस फिल्म का थ्रिल लोगों को सिनेमाघरों तक खींच ला रहा है. धुरंधर 2 में एक्टिंग से लेकर डिटेल्स पर बहुत बातें हो चुकी हैं, पर एक और चीज है जो धुरंधर को बाकि फिल्मों से अलग बनाती है और वो है इसका बैकग्राउंड म्यूजिक. धुरंधर 2 के बैकग्राउंड म्यूजिक ने लोगों को 4 घंटे तक बांधे रखने में जबरदस्त रोल प्ले किया है. खास तौर से फिल्म के क्लाइमेक्स में बजे रासपुतिन गाने ने लोगों को रोमांच से भर दिया. आखिर धुरंधर 2 में बोनी एम के गाने रासपुतिन को क्यों बजाया गया और सबसे जरूरी सवाल ये रासपुतिन कौन था ?

धुरंधर 2 फिल्म के क्लाइमेक्स में लेफ्टिनेंट जनरल शमशाद हसन का किरदार निभा रहे राज जुत्सी, हमजा (रणवीर सिंह) को टॉर्चर करते नजर आ रहे हैं. इसी बीच कुछ ऐसा होता है कि बैकग्राउंड में रासपुतिन गाना बजने लगता है. यह गाना शमशाद की कमजोरी को उजागर करता है. जो ऐतिहासिक रहस्य की वजह से होने वाले पतन को दर्शाता है. अब आते हैं सबसे अहम सवाल पर- कौन था रासपुतिन
कौन था रासपुतिन?
साइबेरिया के एक छोटे से गांव में जन्मे ग्रिगोरी रासपुतिन 20वीं शताब्दी की शुरुआत में रूसी शाही परिवार पर काफी प्रभाव रखने वाले विवादास्पद रूसी रहस्यवादी और सलाहकार थे. महारानी एलेक्जेंड्रा के साथ उनके विवादित रिश्ते के चलते वो काफी बदनाम थे.

रासपुतिन का अर्थ होता है व्यभिचारी या लंपट होता है. कई इतिहासकार यह मानते हैं यह नाम उसके गांव के नाम से जुड़ा हो सकता है, लेकिन बाद में उसके विवादित जीवन की वजह से यह लोकप्रिय हो गया.मात्र 18 साल की उम्र में घर छोड़कर साइबेरिया के वेरखोतुरे मठ में जाकर रासपुतिन ने कई रहस्यमयी चीजें सीखीं. कुछ सालों के बाद मठ छोड़कर वो रूस, ग्रीस और यरूशलेम की यात्राओं पर निकल गया.6 फीट 3 इंच लंबे रासपुतिन से जो भी मिलता वो खींचा चला जाता. खासतौर से उसकी आंखें काफी प्रभावित करती थीं. उसकी हल्की नीली आंखें बेहद तेज और प्रभावशाली लगती थीं. जिसकी वजह से महिलाएं उसपर फिदा हो जाती थीं.

महारानी एलेक्जेंड्रा से मुलाकात
साल 1905 में उसकी मुलाकात रूसी सम्राट निकोलस II और महारानी एलेक्जेंड्रा से हुई. उनके बेटे को हीमोपीलिया बीमारी थी, जिसकी वजह से उसका खून रुकता ही नहीं था. रासपुतिन ने उनके बेटे की बीमारी को काफी हद तक ठीक कर दिया. जिसकी वजह से वह राजपरिवार का विश्वासपात्र हो गया. यहीं से उसकी मेन कहानी की शुरूआत होती है.रासपुतिन एक करिश्माई व्यक्तित्व का इंसान था. उसकी धार्मिक बैठकों में राजधानी की उच्च वर्ग की महिलाएं आती थीं. कई महिलाएं उसके हाथों को चूमती थीं तो कई उसके कपड़ों के किनारे को.

रूस की उच्च वर्ग की महिलाएं थी फैन
बाद में उसके कई महिलाओं के साथ संबंध बने. ये सभी महिलाएं रूस की सबसे उच्च वर्ग की थीं. 1911 तक यह मामला इतना बढ़ गया था कि उसे राजधानी से बाहर निकाल दिया गया, हालांकि महारानी एलेक्जेंड्रा के कहने पर वापस बुला लिया गया.रासपुतिन के बढ़ते प्रभाव से कई प्रभावशाली लोग खुश नहीं थे. वो उसे रास्ते से हटाना चाहते थे. 30 दिसंबर 1916 को प्रिंस फेलिक्स और उसके साथियों ने उसके सिर में गोली मारकर नदी में फेंक दिया.बताया जाता है कि रासपुतिन का रूस की महिलाओं में इतना क्रेज था कि उसकी मौत के बाद उसके जननांग को काटकर शीशी में रखा गया. हालांकि कई इतिहासकार इसे सिर्फ अफवाह मानते हैं.
