दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संदेश के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) आईजीएमसी शिमला ने हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया है। वहीं, सोमवार को डीडीयू में ओपीडी सेवाएं शुरू हो गई हैं लेकिन आईजीएमसी में हड़ताल समाप्त करने की घोषणा के बावजूद रेजिडेंट्स काम पर नहीं लौटे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला के रेजिडेंट डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म करने का एलान किया है। वहीं, सोमवार को डीडीयू में तो ओपीडी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। मरीजों की काफी भीड़ है, लेकिन आईजीएमसी में रेजिडेंट्स वापस काम पर नहीं लौटे हैं।
दिल्ली से लाैटने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संदेश के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) आईजीएमसी शिमला यह ने फैसला लिया। सीएम ने दोटूक कहा था कि पहले हड़ताल वापस लो, उसके बाद बातचीत होगी।
उधर, आरडीए का दावा है कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में विस्तृत जांच शुरू करने और डॉ. राघव निरूला को बर्खास्त करने के आदेश वापस लेने का आश्वासन दिया है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर विश्वास जताते हुए जनहित को ध्यान में रखते हुए हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। रविवार देर शाम हुई बैठक के बाद आरडीए के अध्यक्ष डा. सोहेल शर्मा ने इसकी घोषणा की।
डॉ. सोहेल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया गया है। बर्खास्तगी आदेश रद्द होने तक आरडीए जांच में सहयोग करेगी। आगे की कार्ययोजना के लिए 3 जनवरी को बैठक होगी। उन्होंने राज्य की आरडीए और पूरे देश की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन को इस एकजुटता के लिए आभार व्यक्त किया। हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन, एसएएमडीसीओटी, राज्य के सभी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन और अन्य सभी एसोसिएशनों ने इस हड़ताल का समर्थन दिया था।
26 दिसंबर से हड़ताल पर गए थे डॉक्टर
मरीज से मारपीट मामले में आईजीएमसी के सीनियर रेजिडेंट डाॅ. निरूला को सरकार ने बर्खास्त किया था। बर्खास्तगी को रद्द करने की मांग को लेकर आरडीए और हिमाचल मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन ने 26 दिसंबर को सामूहिक अवकाश, 27 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी।
दो समूहों में बंटी आरडीए, हड़ताल समाप्त करने पर दूसरा गुट नाराज
हड़ताल समाप्त करने को लेकर आरडीए दो समूहों में बंट गई है। आरडीए का दूसरा धड़ा सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने तक हड़ताल जारी रखने पर अड़ा हुआ है। रविवार को इस गुट ने आईजीएमसी के गेट पर वी वांट जस्टिस के नारे लगाए। इन रेजिडेंट डाॅक्टरों ने कहा कि लोगों ने आकर चिकित्स्कों को गालियां दीं, उन्हें मरने की धमकी दी, इससे उनका काम करना मुश्किल है। महिला चिकित्स्कों के लिए ड्यूटी रूम नहीं हैं, अस्पताल परिसरों में सीसीटीवी कैमरा नहीं है और न सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। इसलिए सरकार हमारी सुरक्षा को लेकर एसओपी जारी करे।
डॉक्टर के कॅरिअर को बर्बाद करना उद्देश्य नहीं : सुक्खू
आरडीए की हड़ताल समाप्त करने की घोषणा से पहले मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार दोपहर को नई दिल्ली से लौटने के बाद कहा कि उनके मन में डॉक्टर के कॅरिअर को बर्बाद करना उद्देश्य नहीं है। अनाडेल में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि टांडा मेडिकल कॉलेज की एसोसिएशन ने सही कहा है कि डॉक्टर ने गलती की है। अगर गलती बार-बार अस्पताल में होती रही तो मरीज कोई नहीं आएगा। पैसे वाले मरीज बड़े-बड़े अस्पतालों में चले जाते हैं। डॉक्टर और मरीज सभी परिवार के सदस्य हैं। वह परिवार के मुखिया होने के नाते कह रहे हैं कि हड़ताल खत्म कर ज्वाइन करें। सीएम सुक्खू ने कहा कि चिकित्सकों सुरक्षा देने का दायित्व भी सरकार का है। वह मरीज उस डॉक्टर का भाई होता तो भी क्या वह हड़ताल करते। उन्होंने कहा कि अहं छोड़कर डॉक्टर सोमवार से अस्पताल जाएं, उसके बाद सरकार उनसे बातचीत कर समाधान निकालेगी।
