क्या आप जानते हैं कि मूत्राशय का कैंसर दुनिया के सबसे खर्चीले और जटिल कैंसर में से एक है? इसके मरीजों के लिए अब एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।
मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और चार अन्य कैंसर सेंटर्स द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण ट्रायल में यह खुलासा हुआ है कि सर्जरी के बाद अगर मरीज को रेडिएशन थेरेपी दी जाए, तो इस कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम आधे से भी कम हो जाता है। आइए, इस महत्वपूर्ण रिसर्च और इसके नतीजों को आसान भाषा में समझते हैं।
क्या कहता है नया रिसर्च?
इस अहम स्टडी को ‘ब्लैडर एडजुवेंट रेडियोथेरेपी’ परीक्षण नाम दिया गया है। इसके शानदार और सकारात्मक नतीजे हाल ही में मशहूर मेडिकल पत्रिका ‘जर्नल ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी’ में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब मूत्राशय का कैंसर एक बार ठीक होने के बाद शरीर में दोबारा लौटता है, तो इसे हराना बहुत मुश्किल हो जाता है। उस स्थिति में इलाज के विकल्प बेहद सीमित रह जाते हैं और मरीज के जीवित रहने की अवधि भी कम हो जाती है, लेकिन यह नया अध्ययन उम्मीद की किरण लेकर आया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि सर्जरी के बाद दी जाने वाली रेडिएशन थेरेपी कैंसर की वापसी के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। साथ ही, इसके जो भी थोड़े-बहुत साइड इफेक्ट्स होते हैं, उन्हें आसानी से मैनेज किया जा सकता है।
कैसे हुआ ट्रायल और क्या रहे नतीजे?
आखिर यह रिसर्च कैसे की गई? इस ट्रायल में कुल 153 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनकी मूत्राशय के कैंसर की सर्जरी हाल ही में हुई थी।
ट्रायल के दौरान आधे मरीजों को सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी दी गई।
वहीं, बाकी बचे आधे मरीजों को सिर्फ मेडिकल निगरानी में रखा गया।
इसके नतीजे बिल्कुल स्पष्ट थे। जिन मरीजों ने रेडिएशन थेरेपी ली थी, उनमें कैंसर के दोबारा होने का खतरा 50 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हो गया। यह ट्रायल इस बात का एक बहुत ही पुख्ता सबूत है कि जिन मरीजों में कैंसर के लौटने का खतरा ज्यादा होता है, उन्हें रेडिएशन थेरेपी देकर बचाया जा सकता है।
एक गंभीर चुनौती है मूत्राशय का कैंसर
इस बीमारी की गंभीरता को समझना भी बेहद जरूरी है। मूत्राशय का कैंसर न सिर्फ अपनी पहचान और इलाज के नजरिए से काफी कठिन है, बल्कि यह सबसे खर्चीले कैंसरों में भी गिना जाता है।
दुनिया में 9वां स्थान: यह विश्व स्तर पर पाया जाने वाला नौवां सबसे आम कैंसर है।
लाखों लोग हैं पीड़ित: साल 2022 के आंकड़ों की बात करें तो पूरी दुनिया में 6 लाख से ज्यादा लोगों में इस बीमारी की पहचान हुई थी।
पुरुषों को ज्यादा खतरा: यह बीमारी मुख्य रूप से पुरुषों को अधिक अपना शिकार बनाती है और उन्हें ज्यादा प्रभावित करती है।
कुल मिलाकर, टाटा मेमोरियल और अन्य सेंटर्स की यह रिसर्च मूत्राशय कैंसर से जंग लड़ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है, जो उनके भविष्य के इलाज की दिशा को पूरी तरह से बदल सकती है।
