नेपाल में जिस दिन जलप्रलय ने तबाही मचाई थी उस दिन कुछ ही मिनटों में तीन चेतावनियां मिली थीं। एक अकाउंटेंट ने आकर बताया कि पानी तेजी से अंदर आ रहा है, फिर एक टीचर ने ऊपरी इलाके से फोन करके बताया कि इलाका पूरी तरह से डूब गया है, इसके बाद एक पिता अपनी बच्ची को लेने के लिए स्कूटर से स्कूल पहुंचे थे।
त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाडी को एक साथ तीन चेतावनियां मिली थीं और उन्होंने स्कूल के लगभग 900 छात्रों को बाहर निकालने का आदेश दिया। इससे पहले कि नदी 76 साल पुराने कैंपस को बहा ले जाती वे सभी सुरक्षित निकल गए।
‘नदी से डर लगता है डर’
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दवाडी का कहना है कि बच्चे तो बच्चे यहां तक कि टीचर और घरेलू स्टाफ भी नदी से डरे हुए हैं। जब भी नदी को देखते हैं तो इन्हें डर लगता है। जब उन्हें चेतावनी मिली तो स्कूल में बच्चों समेत लगभग एक हजार लोग मौजूद थे। तीस लड़कियां रेजिडेंशियल हॉस्टल में थीं।
1,643 स्टूडेंट्स की बची जान
जब इन लड़कियों ने दवाडी से पूछा कि वे कहां जाएं क्योंकि घर दूर थे तो वह इन बच्चों को अपने साथ पहाड़ी पर ऊपर की तरफ ले गए। दवाडी ने एक कर्मचारी को घंटी बजाने का आदेश दिया और टीचर क्लासरूम खाली करवाने लगे। स्टाफ ने पैनिक अटैक से जूझ रहे स्टूडेंट्स की मदद की।
बाढ़ से प्रभावित रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट जिलों में सबसे पुराने स्कूल त्रिभुवन त्रिशूली में 1,643 स्टूडेंट्स थे। स्कूल के अंदर मौजूद सभी स्टूडेंट्स बच गए। दवाडी ने बताया कि दो स्टाफ सदस्य अभी भी लापता हैं।
बाढ़ ने बर्बाद कर दिया स्कूल
बाढ़ ने स्कूल की लगभग हर चीज बर्बाद कर दी, जिसमें 2015 के भूकंप के बाद भारतीय दूतावास की मदद से बना 18 कमरों वाला तीन मंजिला ब्लॉक भी शामिल था। स्कूल की संपत्ति में बस दो बसें ही बचीं। उनमें से एक बस भारतीय दूतावास ने दी थी। दवाडी ने कहा, “बाढ़ में सब कुछ बह गया।”
छात्रों ने बयां किया वो खौफनाक मंजर
छात्रों ने अपने स्कूल को बर्बाद होते देखने के खौफनाक अनुभव के बारे में बताया। 10वीं की एक छात्रा ने बताया, “हम सुबह की असेंबली के लिए तैयार हो रहे थे, तभी टीचर चिल्लाने लगे कि हम पहाड़ी पर भागें। मैंने अपना बैग और किताबें क्लासरूम में ही छोड़ दीं। पहाड़ी की चोटी से नीचे देखने पर जब मैंने नदी का पानी हमारे खेल के मैदान को डुबोते हुए देखा तो वह नजारा बहुत डरावना था लेकिन मुझे खुशी है कि मेरे सभी दोस्त सुरक्षित बच गए।”
12वीं क्लास के स्टूडेंट को इतना याद है कि बाढ़ को देखने से पहले ही उन्होंने उसकी आवाज सुनी थी। छात्र ने कहा, “गाद को आते देखने से पहले ही नदी की गड़गड़ाहट धीमी बिजली की आवाज जैसी लग रही थी। टीचरों ने तेजी से सभी को हॉस्टल से निकालकर ऊंची जगह पर पहुंचाया। स्कूल अब पूरी तरह कीचड़ में डूबा हुआ है और हमें नहीं पता कि हम कब क्लास में वापस जा पाएंगे लेकिन हम अस्थायी कैंप में एक-दूसरे का ख्याल रख रहे हैं।”