शिमला: Gold Purity Check: भारत में सोना सिर्फ गहनों का सामान नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और निवेश का भी प्रतीक है, लेकिन सोने के बढ़ते दामों के साथ-साथ नकली और मिलावटी गहनों की मंडी भी फैलती जा रही है. ऐसे में असली और नकली सोने की पहचान करना आम आदमी के लिए चुनौती बन गया है. खासकर तब जब सोना बिना हॉलमार्क वाला हो.
शिमला के धीर ज्वेलर्स के ऑनर अभिषेक धीर बताते हैं कि “ग्राहक आज भी कई बार पुराने तरीकों से परख कर असली और नकली सोने के बीच फर्क कर सकते हैं. ये तरीके समय के साथ परखे गए हैं और कई बार बिल्कुल सटीक भी साबित होते हैं”

1. कसौटी पत्थर और नाइट्रिक एसिड टेस्ट: यह तरीका सदियों से सुनार इस्तेमाल करते आ रहे हैं. सबसे पहले गहने को काले रंग के कसौटी पत्थर पर हल्के से रगड़ा जाता है, जिससे उस पर एक निशान बनता है. फिर उस निशान पर एक बूंद नाइट्रिक एसिड डाली जाती है, अगर निशान मिट जाए, तो समझ लीजिए कि उसमें 0% सोना है. अगर निशान बरकरार रहता है, तो सोना असली है. जितना गहरा और स्थिर निशान रहेगा, उतनी ज्यादा शुद्धता मानी जाती है.
2. चुंबक से जांच: सोना मैग्नेटिक नहीं होता. अगर गहना चुंबक से चिपकता है, तो उसमें लोहे या अन्य धातुओं की मिलावट हो सकती है.
3. पानी में डुबोना: असली सोना भारी होता है. इसे एक कटोरी पानी में डालने पर वह तुरंत नीचे बैठ जाता है. नकली गहने या तो तैर सकते हैं या धीरे-धीरे बैठते हैं.
4. सिरका टेस्ट: गहने को कुछ देर सफेद सिरके में डुबोकर छोड़ दें. अगर रंग बदले, तो वह नकली है. असली सोना सिरके से प्रभावित नहीं होता.
5. रंग और चमक से पहचान: जितना ज्यादा सोना शुद्ध होगा, उतनी उसकी चमक ज्यादा होगी. शुद्ध सोने में एक गहरा पीला और लगातार चमकदार रंग होता है, जो समय के साथ फीका नहीं पड़ता. नकली या मिश्रित धातुओं से बने गहने कुछ समय बाद काले या हरे पड़ सकते हैं.
7. आवाज से परख: हल्के से खटखटाने पर असली सोने की आवाज गूंजदार और ठोस होती है, जबकि नकली की आवाज फीकी या खोखली हो सकती है.
Gold Purity Check: तकनीक और ग्राहक की समझ दोनों जरूरी
अभिषेक धीर ने कहा, “आजकल डिजिटल गोल्ड एनालाइजर जैसे XRF मशीन का इस्तेमाल करके तुरंत सोने की शुद्धता मापी जा सकती है, लेकिन देसी तरीके उन जगहों पर आज भी बहुत काम आते हैं, जहां ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं. ग्राहकों को आकर्षक ऑफर्स, भारी डिस्काउंट या लोकल मेले जैसी जगहों पर बिना हॉलमार्क वाले गहनें खरीदने से सावधान रहना चाहिए”.
हॉलमार्क ना हो तो क्या करें?

सोने पर BIS हॉलमार्क, कैरेट नंबर (22K, 24K) और ज्वेलर का कोड जरूर देखें.हर खरीदारी पर ऑथेंटिक बिल और रसीद लें.पुराना सोना भी समय-समय पर प्रमाणित दुकानों पर जांच करवाएं.संदेह होने पर नजदीकी टेस्टिंग लैब में शुद्धता की रिपोर्ट बनवाएं.
Gold Purity Check: सोने की शुद्धता कैसे मापी जाती है?

1. कैरेट सिस्टम
24 कैरेट = 99.9% शुद्ध
22 कैरेट = 91.6% शुद्ध (आमतौर पर गहनों में 22 कैरेट गोल्ड का ही उपयोग होता है)
18 कैरेट = 75% शुद्ध
हर गहने पर यह कैरेट अंकित होना चाहिए.
2. BIS हॉलमार्क
भारत सरकार द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क जिसमें BIS का लोगो, कैरेट और ज्वेलर का पहचान नंबर होता है.

3. डिजिटल मशीन टेस्टिंग
XRF जैसी मशीन, जो तुरंत यह बता सकती है कि गहना किस धातु से बना है.
सोने की पहचान में पुरानी कसौटियां आज भी काम की हैं. बाजार में नकली गहनों के बढ़ते मामलों के बीच, कसौटी पत्थर, सिरका, चुंबक, चमक और रंग जैसी देसी परख आज भी कई बार सही नतीजे देती है. हां, ये तरीके 100% गारंटी नहीं देते, लेकिन ग्राहक की समझ और सतर्कता के साथ मिलकर यह तय कर सकते हैं कि आपके विश्वास की चमक फीकी न पड़े. जैसा कि अभिषेक धीर कहते हैं – “सोने की पहचान सिर्फ मशीन से नहीं, आंख, अनुभव और सजगता से भी होती है”.

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