योग महिलाओं में पालीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मददगार हो सकता है। इसे पहले पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) कहा जाता था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं के अनुसार, योग शरीर में सूजन, आक्सीडेटिव तनाव और तनाव के पाचन तंत्र पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों को कम करके आंतों की सेहत में सुधार कर सकता है।
हालांकि, इस संबंध की पुष्टि के लिए अभी और चिकित्सकीय अध्ययनों की जरूरत है। एम्स के शरीर रचना विज्ञान विभाग और आणविक प्रजनन प्रयोगशाला की डॉ. रीमा दादा और डॉ. दीपिका कुमारी ने इस विषय पर शोधपत्र तैयार किया है। इंटरनेशनल जर्नल आफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में प्रकाशित इस शोधपत्र का शीर्षक है, ‘पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में आंतों के सूक्ष्मजीवों के असंतुलन को सुधारने में योग की संभावित भूमिका’।
हार्मोन और मेटाबोलिज्म पर पड़ता है असर
पीएमओएस एक हार्मोनल और मेटाबोलिक विकार है, जो इंसुलिन प्रतिरोध, पुरुष हार्मोन एंड्रोजन के बढ़े स्तर और लंबे समय तक शरीर में हल्की सूजन से जुड़ा है। यह प्रजनन स्वास्थ्य के अलावा हार्मोनल, चयापचय और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। समय पर पहचान और उपचार नहीं होने पर इससे हृदय रोग, फैटी लिवर और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी जुड़ा हो सकता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, आंतों में मौजूद लाभकारी और अन्य सूक्ष्मजीवों के संतुलन में गड़बड़ी भी इस सिंड्रोम के विकास में भूमिका निभा सकती है। आंतों के बैक्टीरिया की विविधता, उनके द्वारा बनाए जाने वाले पदार्थों और आंतों की अंदरूनी सुरक्षात्मक परत में बदलाव से शरीर का मेटाबालिज्म, रोग प्रतिरोधक क्षमता और हार्मोनल नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
आंत और मस्तिष्क के बीच संबंध अहम
शोधकर्ताओं ने आंत – मस्तिष्क अक्ष यानी गट-ब्रेन एक्सिस की भूमिका पर भी चर्चा की है। यह तंत्रिका तंत्र, हार्मोन और प्रतिरक्षा प्रणाली के जरिए आंत और मस्तिष्क के बीच दोतरफा संवाद स्थापित करता है। पीएमओएस में तनाव से जुड़ी सहानुभूति तंत्रिका तंत्र की बढ़ी सक्रियता आंतों में रक्त प्रवाह, मल त्याग और आंतों की सेहत बनाए रखने वाले पदार्थों के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इसके विपरीत, योग पैरासिम्पथेटिक तंत्रिका तंत्र की सक्रियता बढ़ा सकता है, जो आराम और सामान्य पाचन क्रिया से जुड़ा है। इससे आंतों की सुरक्षात्मक परत मजबूत करने, सूजन घटाने और लाभकारी बैक्टीरिया के अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि योग और आंतों के सूक्ष्मजीवों के बीच संबंधों को लेकर अभी पर्याप्त प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह पता लगाने के लिए सुव्यवस्थित चिकित्सकीय अध्ययन करने की जरूरत बताई है कि योग वास्तव में आंतों के स्वास्थ्य को कितना प्रभावित करता है और क्या इससे महिलाओं के मेटाबोलिक, हार्मोनल तथा प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार होता है।
तनाव कम कर पाचन तंत्र को फायदा पहुंचा सकता है योग
शोधपत्र में बताया गया है कि योग के तीन प्रमुख हिस्से-आसन, प्राणायाम और ध्यान – शरीर की तनाव प्रतिक्रिया, हार्मोनल संतुलन और सूजन को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले अध्ययनों में योग को बेहतर हार्मोनल और कोलेस्ट्रॉल स्तर, इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता में सुधार, तनाव हार्मोन और सूजन पैदा करने वाले पदार्थों में कमी तथा आक्सीडेटिव तनाव घटने से जोड़ा गया है। इससे पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता और कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को भी लाभ मिल सकता है।
