शिमला: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 12 साल बाद महाकुंभ(Maha Kumbh) का आयोजन होने जा रहा है. जिसके लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार देशभर में बड़े नेताओं को महाकुंभ में आने के लिए निमंत्रण दे रही है. इसी के तहत योगी सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह और खेल एवं युवा मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चंद्र यादव ने शिमला पहुंच कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान दोनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महाकुंभ प्रयागराज-2025 में पधारने का निमंत्रण दिया.
हिंदू धर्म में Maha Kumbh का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में महाकुंभ(Maha Kumbh) का विशेष महत्व है. अगले साल प्रयागराज में संगम किनारे महाकुंभ मेले का आयोजन होने जा रहा है. इसमें शामिल होने के लिए देश सहित दुनिया भर से लोग महाकुंभ में पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं. वहीं, महाकुंभ ही एक ऐसा आयोजन है. जिसमें बड़ी संख्या में नागा साधु भी पावन भूमि प्रयागराज आते हैं. महाकुंभ में कई महान साधु-संतों का जमावड़ा लगता है, जिसे देखने के लिए लोगों के अंदर एक अलग ही उत्सुकता और उत्साह रहता है. महाकुंभ का आयोजन 12 साल बाद होता है. जिसका आयोजन चार तीर्थ स्थल प्रयागराज में संगम किनारे, हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे, उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर और नासिक में गोदावरी नदी पर किया जाता है. जहां देश और विदेशों से आने वाले श्रद्धालु पवित्र स्नान का पुण्य के भागीदार बनते हैं.
इस दिन से शुरू होगा महाकुंभ
जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब महाकुंभ(Maha Kumbh) मेला शुरू होता है. ऐसे में 13 जनवरी 2025 से प्रयागराज में महाकुंभ शुरू होने जा रहा है. इस दौरान संगम में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. महाकुंभ 26 फरवरी 2025 को समाप्त होगा. इस बार महाकुंभ में 25 करोड़ लोगों के आने की संभावना है. वहीं, महाकुंभ के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है. इसमें सुरक्षा व्यवस्था के साथ लोगों के ठहरने और खाने पीने की व्यवस्था की जा रही है. प्रयागराज में महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए होटल, लॉज, धर्मशाला, पेइंग गेस्ट हाउस और टेंट कॉलोनियों में अलग-अलग श्रेणियों की व्यवस्था की जा रही है. इनमें से कुछ स्थानों की बुकिंग महीनों पहले ही शुरू हो चुकी है. महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में तीर्थयात्रियों के लिए कई धर्मशालाएं और पेइंग गेस्ट हाउस उपलब्ध हैं. बता दें कि पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत को लेकर राक्षसों और देवताओं के बीच संघर्ष हुआ था, तब अमृत की कुछ बूंदें, इन्हीं चार स्थानों पर गिरी थी. इसलिए प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में ही कुंभ का आयोजन किया जाता है.

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