देहरादून: Dehradun Zoo Tiger: बाघों की जोड़ी ने देहरादून जू यानी चिड़ियाघर को मालामाल कर दिया है. जी हां, बाघ को करीब से निहारने के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ रहा है. जिसके चलते पिछले 4 महीने में ही बाघों ने कमाई में रिकॉर्ड इजाफा करवा दिया. खास बात ये है कि चिड़ियाघर प्रबंधन ने पिछले नवंबर महीने में ही जू की एंट्री फीस भी बढ़ा दिया था, लेकिन इसके बावजूद भी चिड़ियाघर में देशभर के पर्यटक पहुंच रहे हैं. इसके पीछे का कारण वो दो टाइगर्स हैं, जो नवंबर महीने में ही चिड़ियाघर में लोगों के दीदार के लिए रखे गए हैं.
दरअसल, देहरादून चिड़ियाघर में कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेस्क्यू सेंटर से दो टाइगर्स लाए गए थे. ढेला रेस्क्यू सेंटर से लाने की वजह एक बाघ का नाम D2 और दूसरे का नाम D5 रखा गया है. चिड़ियाघर में 25 नवंबर को इन दोनों ही बाघों(Dehradun Zoo Tiger) को सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) की अनुमति के बाद आम लोगों के दीदार के लिए सार्वजनिक किया गया. वैसे तो पहले चिड़ियाघर में एंट्री फीस करीब ₹50 रखी गई थी, लेकिन इन दोनों ही बाघों को यहां पर लाने के बाद चिड़ियाघर की एंट्री फीस को ₹50 से बढ़ाकर ₹100 कर दिया गया.

बाघों की जोड़ी ने बढ़ाई जू की इनकम: खुशी की बात ये है कि टाइगर्स की यह जोड़ी जैसे ही चिड़ियाघर में सैलानियों के दीदार के लिए सार्वजनिक की गई, वैसे ही चिड़ियाघर की आमदनी भी बढ़ने लगी. यानी टाइगर्स की जोड़ी ने देहरादून चिड़ियाघर को मालामाल करना शुरू कर दिया. यही वजह है कि करीब 5 महीने में ही चिड़ियाघर की इस कदर आमदनी हुई कि पिछले सभी रिकॉर्ड टूट गए.
देहरादून चिड़ियाघर से मिले आंकड़ों के अनुसार, 25 नवंबर को बाघों(Dehradun Zoo Tiger) के दीदार के बाद दिसंबर 2024 में 49,07,310 रुपए की आमदनी हुई. इसके अगले महीने जनवरी 2025 में 61,92,580 रुपए चिड़ियाघर ने सैलानियों से कमाए. इसके बाद फरवरी महीने में चिड़ियाघर को 36,30,465 रुपए की कमाई हुई. जबकि, मार्च महीने में कमाई बढ़ाकर 45,68,875 रुपए हो गई. उधर, इस महीने 24 अप्रैल तक चिड़ियाघर 46 लाख रुपए रुपए कमा चुका है.

इसी आंकड़े को सालाना रूप से तुलना करें तो साल 2008-09 में चिड़ियाघर में करीब 7,30,000 रुपए कमाए थे. यह आंकड़ा साल 2009-10 में 10,50,000 रुपए पर पहुंच गया. उसके बाद साल 2010-11 में आंकड़ा बढ़कर 13 लाख 50 हजार रुपए पहुंचा. हालांकि, साल 2011-12 में कमाई का आंकड़ा घटकर 12 लाख 90 हजार रुपए हो गया.

देहरादून चिड़ियाघर की कमाई 2012-13 में बढ़कर 18 लाख रुपए पहुंच गई. उसके बाद 2013-14 में 23 लाख 28 हजार रुपए की कमाई हुई. साल 2014-15 में 25 लाख 61 हजार रुपए का चिड़ियाघर को राजस्व मिला. साल 2015-16 में 40 लाख 77 हजार रुपए चिड़ियाघर ने कमाए. साल 2016-17 में 76 लाख 73 हजार रुपए की कमाई हुई. साल 2017-18 में 1 करोड़ 98 लाख रुपए देहरादून चिड़ियाघर को मिले.
साल 2018-19 में देहरादून चिड़ियाघर की कमाई बढ़ाकर 2 करोड़ 11 लाख रुपए हो गई. इसके बाद कोरोना के चलते कमाई घटने लगी और साल 2020-21 में कमाई 1 करोड़ 16 लाख रुपए ही रह गई. साल 2021-22 में भी कोरोना का प्रकोप रहा और कमाई फिर भी 2 करोड़ 7 लाख रुपए तक रही. साल 2022-23 में यह कमाई 3 करोड़ 99 लाख रुपए तक पहुंच गई.

इसके बाद साल 2023-24 में देहरादून चिड़ियाघर की कमाई फिर बढ़ी. जिससे यह कमाई 4 करोड़ 36 लाख रुपए पहुंच गई. चिड़ियाघर प्रबंधन इस कमाई से ज्यादा रेवेन्यू मिलना मुश्किल समझ रहा था, लेकिन इस दौरान वन विभाग के प्रयासों से चिड़ियाघर में दो बाघों(Dehradun Zoo Tiger) की जोड़ी को लाया गया. जिसके चलते चिड़ियाघर ने कमाई में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4 करोड़ 62 लाख 30 हजार रुपए का राजस्व हासिल किया, जो कि अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.

देहरादून चिड़ियाघर में आने वाले सैलानियों में केवल देहरादून या आसपास के लोग ही नहीं होते, बल्कि यहां जम्मू कश्मीर से लेकर दक्षिण भारत के राज्यों के लोग भी आकर तमाम वन्यजीवों का दीदार करते हैं. देहरादून चिड़ियाघर घूमने आए ऐसे ही कुछ लोगों से ईटीवी भारत में बात की.
देहरादून जू में मौजूद हैं 500 वन्यजीव: देहरादून जू में करीब 500 वन्यजीव मौजूद हैं. जबकि, वन्यजीवों की 47 प्रजातियां यहां रखी गई हैं. जू में हर महीने करीब 10 लाख रुपए का खर्चा होता है. जिसमें कर्मचारियों की सैलरी, बिजली-पानी और मेंटिनेंस आदि शामिल है.

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