ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है, लेकिन फिर भी इस बारे में जागरूकता काफी कम है। जब भी ब्रेस्ट कैंसर की बात आती है, तो ज्यादातर महिलाओं के दिमाग में पहला ख्याल गांठ का ही आता है, लेकिन सच ये है कि ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत हमेशा गांठ से ही हो, ये जरूरी नहीं।
कभी-कभी इसके शुरुआती संकेत बहुत मामूली हो सकते हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि हर बदलाव को देखकर घबराना नहीं है। कई बार ये पूरी तरह से सामान्य होते हैं, लेकिन अगर कोई नया बदलाव दिखे, तो एक बार डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
स्तन या कांख में नई गांठ
ये ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम लक्षण है। ये गांठ छूने में सख्त या आसपास के टिश्यूज से अलग लग सकती है। हालांकि, कैंसर की गांठ कैसी महसूस होगी, इसका कोई एक तय पैमाना नहीं है। सबसे ध्यान देने वाली बात ये है कि इसमें कोई दर्द न हो ऐसा भी हो सकता है। इसलिए कोई भी नई गांठ नजर आए, तो डॉक्टर से तुरंत जांच करानी चाहिए।
एक स्तन का अचानक अलग दिखना
दोनों स्तनों का एक जैसा न दिखना सामान्य बात है, लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि क्या कोई नया बदलाव हुआ है? अगर बिना किसी वजह के एक स्तन अचानक बड़ा, सूजा हुआ, भारी या उसके आकार में बदलाव दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
त्वचा में गड्ढे या संतरे के छिलके जैसा खिंचाव
ब्रेस्ट की स्किन पर ध्यान देना भी काफी जरूरी है। अगर त्वचा पर सिकुड़न, गड्ढे या त्वचा का मोटा होना दिखे, जो संतरे के छिलके की तरह लगे, तो यह एक गंभीर संकेत है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निप्पल का अचानक अंदर की तरफ मुड़ना
कुछ महिलाओं के निप्पल जन्मजात रूप से अंदर की तरफ होते है, जो चिंता की बात नहीं है। लेकिन अगर कोई निप्पल अचानक अंदर की तरफ खिंचने या मुड़ने लगे, तो इसकी जांच करवाना जरूरी है।
खून या असामान्य निप्पल डिस्चार्ज
निप्पल से फ्लूइड डिस्चार्ज के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर बिना दबाए अपने आप डिस्चार्ज हो रहा है हो, खासकर किसी एक स्तन से, तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है। साथ ही, यह जांचने के लिए निप्पल को बार-बार दबाकर न देखें।
कांख में गांठ या सूजन
ब्रेस्ट कैंसर स्तन के पास मौजूद लिम्फ नोड्स में भी फैल सकता है। इसलिए कई बार स्तन की जगह कांख या कॉलर बोन के पास सूजन या गांठ महसूस होती है। ऐसी सूजन को नजरअंदाज न करें।
लगातार रेडनेस, सूजन या त्वचा में बदलाव
अगर ब्रेस्ट लाल हो जाए, सूज जाए, असामान्य रूप से गर्म लगे या उसकी त्वचा में तेजी से बदलाव आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। ये लक्षण इन्फेक्शन के हो सकते हैं, लेकिन अगर ये लक्षण बने रहें, तो इंफ्लेमेटरी ब्रेस्ट कैंसर से भी जुड़े हो सकते हैं।
कैंसर में दर्द होना जरूरी नहीं है
ये एक भ्रम है कि ब्रेस्ट कैंसर में दर्द होता है। दर्द होना कैंसर की मौजूदगी जांचने का सही पैमाना नहीं है। कोई महिला पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करते हुए भी ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती चरण में हो सकती है।
आपको क्या करना चाहिए?
महिलाओं को अपने स्तनों की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए, ताकि उन्हें पता रहे कि उनके ब्रेस्ट सामान्य रूप से कैसे दिखते और महसूस होते हैं।
खुद से इंटरनेट पर इलाज ढूंढ़ने या किसी दूसरे के अनुभव से अपनी बीमारी का अंदाजा न लगाएं। अगर मन में संदेह आए, तो डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे बेहतर तरीका है।
