मैं ठीक हूं Ideal Father

मेरे पापा सबसे स्ट्रॉन्ग। बचपन में हम सभी यही बोलते हुए बहुत गर्व महसूस करते हैं। हमारे लिए पापा किसी सुपर हीरो से कम नहीं। क्योंकि बड़ी से बड़ी मुश्किल या चुनौती में भी वो हमेशा मजबूती से खड़े रहते हैं और कठिन समय से परिवार को बाहर ले आते हैं।पापा पर इसका कुछ असर भी नहीं होता क्योंकि वो खुद ही तो कहते हैं ‘मैं ठीक हूं’। लेकिन जब हम बड़े होते हैं, तब समझ आता है कि ये सब एक दिखावा बस था।हम समझना शुरू कर देते हैं कि पापा भी तो आम इंसान हैं, जिन्हें दुख होता है, दर्द होता है, वो भी परेशान होते हैं, उनका भी उम्मीद छोड़ने का मन करता है, पर वो सिर्फ अपने बच्चों व परिवार की खातिर हमेशा खुद को मजबूत दिखाते हैं।

अरे मेरे लिए तो यही ठीक है
पापा ये डॉल चाहिए, पापा मुझे नई बॉटल चाहिए, पापा मुझे भी नया बैग चाहिए, ये नया वाला फोन मुझे भी दिलाओ… अपने पिता से बच्चे न जाने कितनी डिमांड कर डालते हैं, बिना ये सोचे कि आखिर इन चाहतों को पूरा करने के लिए वो खुद कितने त्याग करते हैं।भले ही खुद की शर्ट पुरानी हो गई हो, लेकिन वो अपने बच्चों को नए कपड़े दिलाते हैं। बच्चे मॉर्डन जमाने के साथ चलें इसके लिए वो उन्हें महंगा मोबाइल तक दिला देते हैं और अपनी टूटी स्क्रीन के फोन के लिए भी कहते हैं ‘अरे मेरे लिए तो यही ठीक है, मुझे किसे दिखाना है’।इस तरह का झूठ बोल अपने शौक का गला घोंटकर इच्छाएं पूरी करना पापा के लिए तो जैसे आम ही होता है।
करो अपने मन की, फंसे तो मैं नहीं आऊंगा बचाने
पापा की सबसे बड़ी धमकी और झूठ, ‘फंसे तो मैं नहीं आऊंगा बचाने’। लेकिन बच्चा जब सच में किसी मुश्किल में पड़ जाता है, फिर भले ही फिर इसकी वजह उसका मनमानी से भरा फैसला ही क्यों न रहा हो, पर पिता हमेशा उसे बचाने दौड़ पड़ते हैं।वो अपने आत्म-सम्मान तक की परवाह नहीं करते और जरूरत पड़ने पर बच्चे के लिए माफी में सिर तक झुका देते हैं।

मम्मी सही कह रही हैं
पापा आप तो हमेशा मां का ही साथ देते हो। ऐसी शिकायतें न जाने कितने बच्चों की रही होगी। लेकिन सच तो ये है कि इसके पीछे अहम कारण छिपा है।पापा भले ही मम्मी की बात से सहमत न हों, लेकिन वो कभी भी बच्चों के सामने उन्हें गलत नहीं ठहराएंगे, फिर इसके लिए भले ही उन्हें झूठ ही क्यों न बोलना पड़े।बाद में भले ही वो अपनी पत्नी से बात करें और बीच का रास्ता निकालें पर बच्चों के सामने तो वो मां के सम्मान को बरकरार ही रखेंगे। ऐसा करके वो अपने पति होने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
अरे वो तो खत्म हो गया
मुझे और चॉकलेट खानी है… अरे वो तो खत्म हो गई, मुझे और कोल्ड ड्रिंक पीनी है… वो तो खत्म हो गई, मुझे और मोबाइल देखना है… लेकिन बैटरी तो खत्म हो गई अब थोड़ी देर बाद देखना।भले ही चॉकलेट भरी पड़ी हो, फ्रिज में कोल्ड ड्रिंक भी हो और मोबाइल भी चार्ज हो, लेकिन पापा कह देते हैं कि ‘खत्म हो गया’। इन शब्दों को वो कई अन्य स्थितियों में भी इस्तेमाल करते हैं।इस झूठ के पीछे की सबसे बड़ी वजह है बच्चे को कुछ भी अति में करने से रोकना और जिद्दीपन कम करना। ये चीज हमें तभी समझ आती है जब हम बड़े हो जाते हैं या फिर खुद पैरेंट बनते हैं।

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