भगवान राम के मंदिर की लूट के आरोपों के बाद अब महाकाल की नगरी उज्जैन भी सवालों के घेरे में है. एक बड़े मीडिया संस्थान की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो गंभीर हितों के टकराव (Conflict of Interest) और सार्वजनिक पद की नैतिकता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं.
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने 2021 से 2025 के बीच उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी है. रिपोर्ट के अनुसार, परिवार और संबंधित कंपनियों द्वारा कम से कम 137 प्लॉट (168 एकड़) खरीदे गए, जिनका मूल्य लगभग ₹45 करोड़ बताया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जमीनों का बड़ा हिस्सा उन इलाकों में स्थित है जहां नई सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित या विकसित की जा रही हैं और जहां उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि को आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बदलने का प्रस्ताव है. इसी कारण हितों के टकराव (Conflict of Interest) और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार परिवार की कुल भूमि होल्डिंग लगभग 335 एकड़ बताई गई है, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनकी पत्नी सीमा यादव, पुत्र वैभव यादव, पुत्रवधू शालिनी यादव, भाइयों, बहन तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल हैं.
यशपाल आर्य ने सवाल उठाते हुए कहा, क्या इन भूमि सौदों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी? क्या यह स्पष्ट किया जाएगा कि भूमि खरीद और सरकारी विकास परियोजनाओं के बीच कोई हितों का टकराव था या नहीं? मुख्यमंत्री मोहन यादव इन आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण कब देंगे? क्या जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए पूरे मामले की न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी? लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनता का सबसे बड़ा अधिकार है.
